अन्नमय्य कीर्तन कामधेनुविदे - Konkani - रावण - श्री वेंकटेश्वर स्वामी कीर्तनां - भारतीय स्वातंत्र्य दीस | BhaktiGranth: A Library Of Vedas, Stotrams, & Devotional Literature
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अन्नमय्य कीर्तन कामधेनुविदे - श्री वेंकटेश्वर स्वामी कीर्तनां


कामधेनु विदे कल्पवृक्ष मिदे
प्रामाण्यमु गल प्रपन्नुलकु ॥

हरिनामजपमे आभरणंबुलु
परमात्मुनिनुति परिमलमु ।
दरणिदरु पादसेवे भोगमु
परमंबॆरिगिन प्रपन्नुलकु ॥

देवुनि ध्यानमु दिव्यान्नंबुलु
श्रीविभु भक्ते जीवनमु ।
आविष्णु कैंकर्यमे संसारमु
पावनुलगु यी प्रपन्नुलकु ॥

येपुन श्रीवेंकटेशुडे सर्वमु
दापै यितनि वंदनमे विधि ।
कापुग शरणागतुले चुट्टालु
पै पयि गॆलिचिन प्रपन्नुलकु ॥